एनसीएसके के बारे में

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के बारे में

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) का गठन १२ अगस्त, १९९४ को संसद के एक अधिनियम तथा 'राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अधिनियमए, १९९३' द्वारा एक सांविधिक निकाय के रूप में ३ वर्षों की अवधि अर्थात ३१ मार्च १९९७ तक के लिए किया गया था। इस अधिनियम की धारा १ की उपधारा (४) के अनुसार यह ३१/०३/१९९७ के पश्चात निष्प्रभावी होना था। तथापि, इस अधिनियम की वैधता १९९७ तथा २००१ में पारित संशोधन अधिनियमों के तहत क्रमश: मार्च, २००२ तक और उसके पश्चात फरवरीए २००४ तक बढ़ाई गई थी।

"राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अधिनियम, १९९३" के दिनांक २९/०२//२००४ को निष्प्रभावी हो जाने के पश्चात आयोग सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन एक गैर-सांविधिक निकाय के रूप में कार्य कर रहा है जिसका कार्यकाल समय-समय पर सरकारी संकल्पों के तहत बढ़ाया गया है जिसके विवरण नीचे दिए गए हैं :-

सरकारी संकल्प की तारीख अवधि जिसके लिए गैर सांविधिक रा.स.क.आ. का कार्यकाल बढ़ाया गया
24.02.2004 31.08.2004
09.09.2004 01.09.2004 से 31.12.2007
28.12.2007 01.01.2008 से 31.03.2009
02.03.2009 01.04.2009 से 31.03.2010
30.03.2010 01.04.2010 से 31.03.2013
06.03.2013 01.04.2013 से 31.03.2016
31.03.2016 01.04.2015 से 31.03.2019

दिनांक ०२/०३/२००९ के संकल्प के साथ पठित दिनांक ०६/०३/२०१३ के संकल्प में निर्धारित अनुसार राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का अधिदेश निम्नानुसार है:-

(क) सफाई कर्मचारियों के स्तर, सुविधाओं तथा अवसरों में असमानताओं को दूर करने की दिशा में केद्र सरकार को विशिष्ट कार्य योजनाओं की सिफारिश करना ;

(ख) सफाई कर्मचारियों, विशेष रूप से स्कैवेंजरों के सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास से संबंधित कार्यक्रमों और योजनाओं के कार्यान्वयन का अध्ययन और मूल्यांकन करना ;

(ग) विशिष्ट शिकायतों की जांच करना तथा निम्नलिखित को कार्यान्वित न करने से संबंधित मामलों का स्वत: संज्ञान लेना :-

  1. कर्मचारियों के किसी भी समूह के संबंध में कार्यक्रम या योजनायें ;
  2. सफाई कर्मचारियों की कठिनाइयों को कम करने की दिशा में निर्णय, दिशा-निर्देश या अनुदेश ;
  3. कर्मचारियों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए उपाय ;
  4. सफाई कर्मचारियों के संबंध में लागू किसी कानून के उपबंधों तथा प्राधिकारों या केद्र सरकार या राज्य सरकार के समक्ष ऐसे मुद्दे उठाना ;

(घ) सरकार, नगरपालिकाओं तथा पंचायतों सहित विभिन्न प्रकार के नियोक्ताओं के अधीन कार्य कर रहे सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा वेतन के साथ.साथ सफाई कर्मचारियों के काम की दशाओं का अध्ययन करना और मानीटर करना और इस संबंध में सिफारिशें करना ;

(ङ) सफाई कर्मचारियों के समक्ष पेश आ रही मुश्किलों तथा असमर्थताओं को ध्यान में रखते हुए सफाई कर्मचारियों से जुड़े किसी भी मामले पर केद्र या राज्य सरकारों को रिपोर्ट देना ; और

(च) केद्र सरकार द्वारा इसे संदर्भित किया गया अन्य कोई मुद्दा ।

तथापि, "हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम, २०१३" के अधिनियमन के पश्चात आयोग का अधिदेश एवं कार्य क्षेत्र भी बढ़ गया है। उक्त अधिनियम की धारा ३१ (१) के अनुसार आयोग निम्नलिखित कार्य निष्पादित करेगा,

नामतः

(क) इस अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी करना;

(ख) इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन के संबंध में शिकायतों की जांच करना और संबंधित प्राधिकारों को उन सिफारिशों के साथ, जिनमें आगे कार्यवाही अपेक्षित है, अपने निष्कर्षों से अवगत कराना; और

(ग) अधिनियम के उपबंधों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु केद्रीय तथा राज्य सरकारों को सलाह देना,

(घ) इस अधिनियम को कार्यान्वित न करने से संबंधित मामले का स्वत: संज्ञान लेना।

अपने कार्यों के निर्वहन में आयोग के पास ऊपर विनिर्दिष्ट किसी मामले के संबंध में किसी सरकार अथवा स्थानीय या अन्य प्राधिकारों से सूचना मांगने की शक्तियां हैं।

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में एक अध्यक्ष (केन्द्रीय राज्य मंत्री के रैंक और हैसियत में) और चार सदस्य, एक महिला सदस्य सहित, ( सचिव, भारत सरकार के रैंक तथा हैसियत में) और सचिव (संयुक्त सचिव, भारत सरकार के रैंक तथा हैसियत में) अन्य सहायक कर्मचारी शामिल हैं।

आयोग का कार्यकरण

आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य सफाई कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों की सामाजिक-आर्थिक तथा रहन-सहन की दशाओं का अध्ययन करने के लिए देश का व्यापक दौरा करते हैं। उनके दौरों के दौरान आयोग के सदस्य सफाई कर्मचारियों के साथ, व्यक्तिगत रूप से तथा उनके प्रतिनिधि संघों के माध्यम से, संवाद करते हैं। उसके बाद सफाई कर्मचारियों की शिकायतों को संबंधित स्थानीय सिविल एवं पुलिस प्राधिकारों के साथ उठाया जाता है।

आयोग को देश भर से सफाई कर्मचारियों से शिकायतें/याचिकाएं भी प्राप्त होती हैं। आयोग इन शिकायतों/याचिकाओं के संबंध में संबंधित प्राधिकारों से तथ्यात्मक रिपोर्टें मंगवाता है और उनसे प्रभावित सफाई कर्मचारियों की शिकायतों का निपटान करने के लिए आग्रह करता है।

आयोग प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से प्राप्त सूचना के आधार पर सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का स्वत: संज्ञान लेता है और सक्रिय भूमिका अदा करते हुये उनका समाधान करने का प्रयास करता है।

जब भी किसी मामले की जांच अथवा पड़ताल की जानी होती है अथवा किसी योजना, कार्यक्रम आदि का मूल्यांकन करना होता है अथवा सफाई कर्मचारियों से संबंधित किसी निर्णय, दिशा-निर्देश, अनुदेश, उपाय अथवा किसी कानून के उपबंधों का कार्यान्वयन न करने की जांच करनी होती है, तब आयोग इस प्रयोजनार्थ देश के किसी भी भाग में यथा आवश्यक बैठकें आयोजित करता है।

इनके निष्कर्षों के आधार पर आयोग सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को समय-समय पर तथा इसके साथ-साथ अपनी वार्षिक रिपोर्टों में हाथ से मैला उठाने की कुप्रथा से सफाई कर्मचारियों को मुक्त करने तथा इनके पुनर्वास हेतु अपनी सिफारिशें देता है।